क्या अतीत या भविष्य में जाकर वापस आ सकते हैं? is it possible to go back in time ?


क्या अतीत या भविष्य में जाकर वापस आ सकते हैं?is it possible to go back in time ?

क्या अतीत या भविष्य में जाकर वापस आ सकते हैं?
Src:- Sadhguru

सवाल  :-


प्राचीन काल के योगियों से लेकर इंटरस्टेलर जैसी लोकप्रिय फिल्मों तक समय की यात्रा की कहानियां और शायद कुछ असली घटनाएं रही हैं क्या समय की यात्रा वाकई संभव है अगर हां तो मैं समय की यात्रा करना कैसे सीख सकता हूं


सद्गुरु  :-

देखिए इन चीजों को काफी गलत समझा गया है .क्योंकि दुर्भाग्य से विज्ञान और गुप्त योगिक ज्ञान हॉलीवुड फिल्मों से आपके पास आ रहे हैं इस संस्कृति में ऐसे लोग रहे हैं जिन्हें त्रिकाल ज्ञानी कहा जाता है आपके जीवन में अनुभव के 3 आयाम होते हैं अतीत नाम की एक चीज होती है जो आपके भीतर यादों का भंडार है वर्तमान नाम की चीज होती है जो अभी का जीवंत अनुभव है भविष्य नाम की चीज होती है जो हमारी कल्पना की शक्ति है तो आपके जीवन का अनुभव यादाश्त वर्तमान अनुभव और कल्पना के बीच होता है ज्यादातर लोगों के साथ समस्या यह है कि वह इन तीनों चीजों में साफ़ अंतर नहीं कर पाते, ज्यादातर इंसान. इसी कारण जो चीज 10 साल पहले हुई थी उसका दुख आपको आज भी होता है ना जो चीज शायद परसों हो अभी से आपको उसका दुख है 10 साल पहले या 10 दिन पहले जो चीज हुई थी क्या अभी उसका अस्तित्व है क्या अभी उसका अस्तित्व है जो चीज शायद परसों हो क्या अभी उसका स्थिति में नहीं तो अगर आप किसी ऐसी चीज से दुखी हैं जिसका अस्तित्व ही नहीं है तो हम आप को समझदार कहे क्या पागल ? अगर आप किसी ऐसी चीज का दुख भोग रहे हैं जिसका अस्तित्व ही नहीं है तो यह समझदारी है या पागलपन ? आप कितने लोगों को जानते हैं आप के सहित जो इस तरह पागल है वह ऐसी चीजों से दुखी हैं जिनका अस्तित्व नहीं है लगभग 99.99% हर समय हो रहा है तो इसी तरह के मूर्ख समय की यात्रा कर रहे हैं समय योग एक विज्ञान में आधुनिक भौतिक विज्ञान हमेशा इन दो आयामों को लेकर उलझन में रहता है समय और स्थान या स्थान और समय वे आमतौर पर यही कहते हैं योग में हम इसे काम कहते हैं काल शब्द का अर्थ तमिल में भी समय होता है मगर काल का अर्थ खालीपन भी होता है काल  काला का मतलब है अंधेरा, अंधेरा यानी कि वहां कुछ नहीं है न रोशनी और कुछ वह खाली स्थान है काल का अर्थ है समय तो हम एक ही शब्द इस्तेमाल कर रहे हैं इस समय और स्थान दोनों के लिए हमारे पास बस एक फर्क है काल और महाकाल एक तरह का समय है जो जीवन के भौतिक आयामों के चक्रों से पैदा होता है भौतिक आयामों के चक्रों से मेरा मतलब है कि हर भौतिक वस्तु की गति चक्रधार होती है चाहे वह एक परमाणु हो या पूरा ब्रह्मांड हो हर चीज की गति चक्रधार है सभी ग्रह ब्रह्मांड हर चीज हर भौतिक चीज मूल रूप से चक्रधार गति में है तो यह काल है

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तो यह काल है वह समय जिसे आप जानते हैं भौतिक वस्तुओं के गोल घूमने के कारण है धरती एक बार घूमती है हम उसे दिन कहते हैं चंद्रमा एक चक्कर लगाता है हम इसे 1 महीना कहते हैं धरती सूरज का चक्कर लगाती है हम इसे 1 साल कहते हैं आप समय को केवल इसी तरह जानते हैं तो आप जिस समय को जानते हैं वह सिर्फ चक्रों के कारण है एक ऐसा भी समय है जो भौतिक प्रकृति से परे है जो भौतिक वस्तुओं के चक्कर लगाने के कारण नहीं है इसे हम महाकाल कहते हैं महाकाल महाकाल में स्थान भी शामिल है आम तौर पर आधुनिक भौतिक विज्ञान में यह स्थान के कारण ही दूरी के कारण ही समय होता है अगर आप पॉइंट पॉइंट जाना चाहते हैं तो आपको समय चाहिए मगर योग एक विज्ञान में अपने अनुभव से हम इसे इस तरह देखते हैं कि समय है इसलिए स्थान की संभावना है आज बहुत सुंदर तरीके से लगभग 15 साल पहले जब उनके पहले से छात्रों ने उनसे पूछा कि इस ब्रह्मांड की प्रकृति क्या है यह कहां से शुरू होता है कहां खत्म होता है कितना बड़ा है वह हंसकर बोले तुम्हारा ब्रह्मांड में उसे एक सरसों के दाने में भर सकता हूं बहुत बढ़िया पैकिंग है उन्होंने कहा इस पूरे ब्रह्मांड को मैं एक सरसों के दाने में भर सकता हूं क्योंकि वह सिर्फ समय का परिणाम है और दूरी सिर्फ समय का नतीजा है तो हम लोगों को त्रिकाल ज्ञानी कहते हैं और हम लोगों को अकाल ज्ञानी भी कहते हैं जिसका अर्थ है समय रहित लोग जो लोग समय से परे होते हैं समय से परे होने का मतलब है आप अभी यहां बैठे हैं अगर मैं आपको और 6 घंटे यहां बैठा लो नहीं आपको इतना समय नहीं लगेगा अगर मैं आपको सिर्फ 2 घंटे और यहां बैठा लो सद्गुरु कम से कम पानी ? ठीक है पानी पी लो पानी मतलब सद्गुरु ठीक है जा कर आओ और 2 घंटे सद्गुरु ठीक है हम आपको वह भी देते हैं उसके बाद आप परमिशन नहीं मांगेंगे आपका शरीर समय का चक्र है ना घड़ी देखने की जरूरत नहीं है अगर आप अपने ब्लैडर पर ध्यान दें आपको समय पता चल जाएगा हां या ना वह समय का ध्यान रख रहा है तो अभी समय कि आप की समझ सिर्फ आप की भौतिक पहचान के कारण है अगर आप शरीर को महसूस किए बिना यहां बैठ सके तो आपको समय का पता नहीं चलेगा आपने उन लोगों के बारे में सुना होगा जो कई घंटे कई दिनों तक बैठे रहे.

मेरे साथ ऐसा हुआ एक बार जब मैं आपसे थोड़ा सा बड़ा था मैं 25 साल का था मैं एक जगह बैठा और अचानक मुझे समय का एहसास नहीं हुआ मुझे लगा कि 10-20 मिनट हुए हैं लेकिन 4:30 घंटे बीत गए थे और मैं परमानंद से फूट रहा था एक जगह बैठ जा और मुझे लगता कि 2 मिनट हुए हैं जबकि कई घंटे 7 घंटे निकल जाते 1 दिन में बैठा और मुझे लगा कि 25 मिनट हुए होंगे मैं मैसूर के पास एक ग्रामीण इलाके में बैठा हुआ था और मैंने आंखें खुली तो भारी भीड़ जमा थी मेरे गले पर फूल मालाएं लटकी हुई थी लोग मेरे पैर खींचने की कोशिश कर रहे थे मैंने पूछा तुम लोग कहां से आ गए फिर उन्होंने कहा आप 13 दिन से यहां बैठे हैं मुझे लगा कि सिर्फ 25 मिनट हुए हैं जब मैंने पैक खोलने की कोशिश की तो पाया कि मेरे घुटने जल गए थे उन्हें सीधा में बहुत दिक्कत हुई मगर मेरे अनुभव में मुझे लगा कि सिर्फ 25 30 मिनट हुए हैं यह बातें शायद आपके लिए समझने में थोड़ी मुश्किल हो मगर क्या आपने ध्यान दिया है कि किसी दिन जब आप बहुत खुश हैं तो 24 घंटे  10 मिनट की तरह निकल गए और दिन आप थोड़े उदास थे 24 घंटे पूरी जिंदगी जितने लंबे लगे समय बहुत सापेक्ष अनुभव है लोग कहते हैं 1 मिनट कितना लंबा है यह इस पर निर्भर करता है कि आप बाथरूम के दरवाजे के किस तरह से दरवाजा खटखटा तो वह कहता है बस 1 मिनट रुको ,

एक मिनट  ???



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