देर रात तक काम करें या सुबह उठकर ? Night Owl or Early Bird: Which Is Better?


एक रोगी रात में नहीं सोएगा एक दोगी रात में नहीं सोएगा और एक जोगी भी रात में नहीं सोएगा क्योंकि उसके लिए भी रात बहुत सहायक होती है रोशनी आपको हर चीज अलग अलग करके दिखाती है मान लीजिए लाइट चली गई थी रात में कुछ ऐसा है की सीमाएं थोड़ी बड़ी हो जाती है तो योग के लिए सेक्सुअलिटी के लिए दोस्ती नज़दीकियां पढ़ाई हो कर इन सभी चीजों के लिए रात ज्यादा सहायक लगती है



सवाल :-

मेरा आपसे सवाल यह है कि ऐसा नहीं है कि मैंने अपने सोने और जागने का समय बदल लिया है और मैं दिन में सोती हूं बात बस यह है कि मैं ना सिर्फ लड़ाई बल्कि बाकी चीजें भी रात में ज्यादा कुशलता से कर पाती हूं मैं रात से बहुत पूर्ति महसूस करती हूं उसकी वजह क्या है धन्यवाद शायद

जवाब:-

हर चीज अलग अलग करके दिखाती है देखी अभी क्योंकि हर रोशनी है मैं इस इंसान को इंसान को इंसान को इंसान को देख सकता हूं मान लीजिए लाइट चली गई और अंधेरा हो गया मैं बस लोगों के झुंड को देख पाऊंगा मैं इस इंसान को इंसान को इंसान को नहीं देख पाऊंगा तो रात में कुछ ऐसा है कि रात में सीमाएं थोड़ी धुंधली हो जाती हैं तो योग के लिए सुख शांति के लिए दोस्ती के लिए नज़दीकियां पढ़ाई फोकस इन सभी चीजों के लिए रात ज्यादा सहायक लगती है क्योंकि रात में आपके और दूसरे के बीच का अंतर कम हो जाता है सिर्फ इसलिए क्योंकि हमारी आंखें इस तरह से काम करती हैं जहां रोशनी ना हो वहां हमारे अनुभव में हर चीज मिलकर एक हो जाते हैं तो एक योगी एक भोगी और एक रोगी यह तीनों रात का इस्तेमाल करते हैं

हर चीज अलग अलग करके दिखाती है देखी अभी क्योंकि हर रोशनी है मैं इस इंसान को इंसान को इंसान को इंसान को देख सकता हूं मान लीजिए लाइट चली गई और अंधेरा हो गया मैं बस लोगों के झुंड को देख पाऊंगा मैं इस इंसान को इंसान को इंसान को नहीं देख पाऊंगा तो रात में कुछ ऐसा है कि रात में सीमाएं थोड़ी धुंधली हो जाती हैं तो योग के लिए सुख शांति के लिए दोस्ती के लिए नज़दीकियां पढ़ाई फोकस इन सभी चीजों के लिए रात ज्यादा सहायक लगती है क्योंकि रात में आपके और दूसरे के बीच का अंतर कम हो जाता है सिर्फ इसलिए क्योंकि हमारी आंखें इस तरह से काम करती हैं जहां रोशनी ना हो वहां हमारे अनुभव में हर चीज मिलकर एक हो जाते हैं तो एक योगी एक भोगी और एक रोगी यह तीनों रात का इस्तेमाल करते हैं

आप  इसका इस्तेमाल कर सकते हैं इसमें कोई समस्या नहीं है जब तक कि आप क्लास में सोती ना हो अगर आप क्लास में नहीं सोती तो यह चलेगा इसमें कुछ गलत नहीं है लेकिन आप इसे आजमा कर देखें क्या मैं कुछ अच्छा कर सकता हूं मैं कुछ ऐसा था जब मैं सोता था मेरा स्कूल आमतौर पर सुबह 8:30 का होता था 6 : 45 से मेरी मां और मेरी बहने मुझे जगाना शुरू कर देती थी बहुत सी चीजें करनी पड़ती थी

वह  मुझे बिस्तर पर उठा कर बैठा देती थी वह आकर मेरी वह  मरोड़ दी थी यह करती थी वह करती थी मेरी मां ने नरमी से करती थी मेरी बहन ने सख्ती से करती थी फिर वह मुझे खींची थी और मेरी मां टूथब्रश लाके कर मुझे दे देती थी मैं उसे मुंह में लगा कर सो जाता था मेरे कपड़े लाकर देती थी और कहती थी नहाने जाओ टाइम हो गया है मैं बाथरूम के अंदर जाता और सो जाता अगर कोई मुझे उठाएं तो मैं दिन में 1-2 बजे तक एक पत्थर की तरह से होता था याद कर कर बैठे नहीं बदलता था बस मुर्दे की तरह लेकिन मैंने 12 साल की उम्र में योग करना शुरू किया
शायद 8 या 9 महीनों के बाद उसके बाद चाहे जिस भी जगह पर होने पर चाहे कहीं भी होने पर चाहे जो टाइम जोन हो रोज में अलग टाइम जोन में होता हूं लेकिन मैं सुबह 3-4 जाग  जाता हूं क्योंकि उस वक्त प्रकृति ने कुछ बदलाव होते हैं मेरा शरीर बस जाग जाता है अगर मैं चाहूं मैं उठकर जो करना चाहे कर सकता हूं अगर मैं ना चाहूं तो मैं थोड़ा और सो सकता हूं लेकिन शरीर हमेशा जाग जाता है तो आपको सिस्टम में थोड़ी संवेदनशीलता लानी होती है कि आप इस धरती के अंस है हां या ना ? हम सब इस धरती से पोप अप हुए हैं

पोप अप से  आप सब चले जाएंगे आप गायब हो जाएंगे आपको विश्वास नहीं होता कि आप चले जाएंगे मैं मैं चला जाऊंगा हां वह सारे चतुर लोग अनगिनत लोग जो इस धरती पर आपसे और मुझसे पहले घूमते थे वह कहां है आपको लग सकता है कि आपका जीवन शानदार है वगैरा-वगैरा जहां तक धरती का सवाल है वह बस अपनी मिट्टी को रीसायकल कर रही है आपको उछाल दी है और फिर वापस खींच लेती है वह चलती है और फिर खींच लेती है तो इस जहां से पॉपअप में अहम चीज और सबसे अहम चीज यह है कि आप अपने भीतर संवेदनशीलता में ऐसी संवेदनशीलता की जीवन का हर आयाम आपके अनुभव में आ जाए इससे पहले कि आप मर जाएं क्या यह महत्वपूर्ण है कि आप जीवन को हरसंभव स्तर पर अनुभव करें अनुभव का मतलब है अनुभव का मतलब है लोग सोचते हैं हमें हर दिन पार्टी करना है एक ही चीज आप कितनी बार करेंगे इंसान के जीवन में खोजने के लिए बहुत कुछ है आपको संवेदनशील होना होगा संवेदनशील से मेरा मतलब है क्योंकि इस शब्द का एक गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाता है इस मायने  में जब लोग कहते हैं संवेदनशील है तो मतलब होता है जरा सी बात का बुरा मान जाएगी

जीवन का संवेदनशील होना और आपका संवेदनशील होना दो अलग चीजें जीवन के संवेदनशील होने का मतलब है कि अगर आप इस हॉल में आते हैं तो आप यहां मौजूद हर चीज का अनुभव करते आपसे कुछ नहीं छुपता अगर अब बाहर जाते हैं तो आप किसी चीज से नहीं चूकते जीवन के हर आयाम को आपके अनुभव में आना चाहिए एक बार एक  आदमी ने काम करवाने के लिए गधा खरीदा जिस आदमी ने गधा बेचा  उसने कहा देखो यह बहुत संवेदनशील है नहीं सकते आप बुरे शब्द नहीं बोल सकते आप गधे को गाली नहीं दे सकते आदमी ने  लेने का है यह तो बहुत अच्छी बात है गधों को पीटते पीटते और गालियां देते देते थक गया हूं इन कदमों से काम कराने के लिए मुझे हर रोज घटिया शब्द बोलने पड़ते मुझे संवेदनशील का अच्छा लगा और उसने गधे की संवेदनशीलता के लिए थोड़े ज्यादा पैसे भी चुकाया  है और उसे घर ले आए उसने गधे को बारे में रखा कल सुबह से घर पर जाना था वहां गया और गधे से बोला चली हमें चलना चाहिए कोई असर नहीं उसने फिर कहा कृपया चलिए कुछ नहीं हुआ उसमें घुटनों के बल बैठकर प्रार्थना की कुछ नहीं हुआ आपको उसे गाली नहीं देनी है आपको उसे पिटना नहीं उसे कुछ समझ में नहीं आया तो वह आदमी के पास वापस गया जिसने गधा बेचा था देखो मैंने गधे से विनती की गिराया प्रार्थना की उस पर कोई असर नहीं हो रहा है मुझे क्या करना चाहिए उस आदमी ने कहा चलो मैं देखता हूं

और वो आया उसने एक ऐसा मोटा डंडा उठाया सिर पर जोर से मारा फिर उसने डंडा फेंक दिया और कहा चलो गधा पीछे चल दिया वह आदमी वह आदमी आग बबूला हो गया और एक बेवकूफ तुमने कहा कि यह संवेदनशील घटाएं और जैसे तुमने जानवर को मारा है मैंने अपने पूरे जीवन में किसी जानवर को नहीं मारा वह बोला नहीं नहीं नहीं यह बहुत संवेदनशील है लेकिन पहले तुम्हें उसका ध्यान खींचना होगा तो संवेदनशीलता विकसित करने का मतलब है कि अगर आप अपनी आंखें बंद करें तो आप जान जाएगी चांद अभी किस अवस्था में क्योंकि यह सब आपके शरीर में हो रहा है हर दिन आपके सिस्टम में जाहिर हो रहा है

अगर पूर्णिमा अमावस्या हो तो पूरा समुद्र चलता है ज्वार भाटा आता है आपका भी समुद्र तट पर गए या नहीं जाते जाते हैं लेने हैं पूरा समुद्र ऊपर उठने की कोशिश कर रहा है आपके शरीर का 72 फ़ीसदी पानी है आपको लगता है कि कुछ नहीं होता सूरज और चंद्रमा की स्थिति और कई चीजें जो धरती के साथ हो रही हैं वह आपके साथ भी हो रही है आपके जीवन को संवेदनशील बनना चाहिए तभी आप जानेंगे कि आपके जीवन के हर पहलू को कैसे संभाले

अपने सामाजिक पहलू को संवेदनशील मत बनाइए अगर आपके भीतर का जीवन संवेदनशील बन जाए और जीवन के साथ जो हो रहा है अगर वह एक चीज आप जानते हैं तो आप देखेंगे कि आपका जीपीएस ऑन हो गया है तब कोई समस्या नहीं होगी आप कभी खाएंगे नहीं इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन क्या कहता है आपके ऐसे हालात में पहुंच गए हैं आप कभी भट्ट करेंगे नहीं क्योंकि आपका जीवन संवेदनशील है इस जीवन की बस यही जरूरत है कि से एक जीवन के रूप में संवेदनशील बनना है अभी हमने एक ऐसा मनोवैज्ञानिक ढांचा विकसित कर लिया है जिसका जीवन से कोई लेना देना नहीं है इसका थोड़ा जीवन  से कोई लेना देना नहीं है