How To Always Make the Right Decision? – Sadhguru

Nobody knows really whether theyre doing the right thing or the wrong thingPeople who think theyre always right, theyre terrible people.When you are reasonably balanced, make a decision, throw your life into it,something wonderful will happen!Superscript: How To Always Make the Right Decision? 

Questioner 2 (Prashant): My question to you is,whenever we make decisions there is always a right or wrong decision –whether the decision taken is right or wrong is only eventually realized.How would I know I took the right decision and how will I know if Im taking the right decisionor wrong decision while making?

Sadhguru: But why are you copying a question?

Questioner 2 (Prashant): copying… thats what I had in mind, so I wrote it down.

Sadhguru: Okay. No, no, Ive…I was never so interested in the examinations, I never bothered.But I saw when I was in college, lot of people inside their sleeve here, there, everywheretheyve written and all kinds of chits and things

 but they were all copying answers.Question you copy because… no, no, Im not trying to make a comment on you because this is everywhere.Because you are creating such a level of conflict within yourself for every simple thingthat you think you could always be doing something wrong, something wrong, something wrong.

Well, joyfully do something wrong. Its okay.


Nobody knows really whether theyre doing the right thing or the wrong thing,do they know for hundred percent?

No.So dont bother yourself too much about “Is this right? Is this wrong?”It is just that when you do something,is this bringing well-being to me and everybody around me? Thats all your concern is.People who think theyre always right, theyre terrible people.You produce tyrants out of this.“I am always right. I made all the right decisions in my life,” this is a tyrant!This is not a human being.It becomes a very ugly human being who does everything right.You dont have to do right things, just be a little more human.Just make sure when you do something, its good for you and good for everybody around you. Thats all.It is right? It is wrong? Who is to decide?If its bringing well-being to everybody, it is the right thing, isnt it?Nobody can decide what is right and what is wrongbecause for a thousand years, theyve debated the same thingsand nobody has come to a conclusion as to what is right and wrong.And people who believe theyre doing the right things,they did the most horrendous things to each other, always.So instead of looking at right and wrong,which is a consequence of a morality that you... in which you believe,why dont you awaken the humanity within you?Why dont you become a living humanity?

Humanity means just this, already we spoke about this -animal nature means fixing boundaries, human nature means expandingor including everybody into your boundaries because this is a natural longing.Wherever you are, you want to be something more, something more, what is this?This is because your intelligence has come to a place where it doesnt like boundaries,it wants to expand. This is human nature.Human nature is naturally inclusive, animal nature is exclusive. It wants to fix boundaries.So instead of being in boundaries of right and wrong,even if somebody is wrong, lets include them and do the best we canbecause the moment you think Im doing all the right things, those… everybody looks wrong in your life.See, please sincerely address this and see, most people are in this condition –except themselves everybody is wrong somewhere.If everybody is wrong, and only youre right, its a sign of madness, it is not a sign of being right (Applause).

So do not waste your time in right decisions, wrong decisions.When you are reasonably balanced, and clear and happy, not frustrated about something,make a decision, throw your life into it, something wonderful will happen!You may not do the right thing but you may do a great thing, you may do a wonderful thing.Thats good enough.How far will I go? What will happen?Well, that depends on various things - your own intelligence, your competence,and the times in which we exist.You should not discount the times in which we exist.At different times in history, different things take off.We may be in sync with it, what we are maybe appreciated today,or what we are maybe appreciated tomorrow, or what we are maybe appreciated after we are gone.But whatever we did in our life, we did with total involvement because life is in its involvement.Life is not in its correctness.Your involvement must be unbridled.Whatever you do, see how everybodys well-being is included in this.If you are an inclusive process, and youre involved, it is fine.Are you right or wrong, till the last day of your life you cannot really decide what is right and wrong,Because there will always be another set of people who says this is wrong. Isnt it?

देर रात तक काम करें या सुबह उठकर ? Night Owl or Early Bird: Which Is Better?

एक रोगी रात में नहीं सोएगा एक दोगी रात में नहीं सोएगा और एक जोगी भी रात में नहीं सोएगा क्योंकि उसके लिए भी रात बहुत सहायक होती है रोशनी आपको हर चीज अलग अलग करके दिखाती है मान लीजिए लाइट चली गई थी रात में कुछ ऐसा है की सीमाएं थोड़ी बड़ी हो जाती है तो योग के लिए सेक्सुअलिटी के लिए दोस्ती नज़दीकियां पढ़ाई हो कर इन सभी चीजों के लिए रात ज्यादा सहायक लगती है

सवाल :-

मेरा आपसे सवाल यह है कि ऐसा नहीं है कि मैंने अपने सोने और जागने का समय बदल लिया है और मैं दिन में सोती हूं बात बस यह है कि मैं ना सिर्फ लड़ाई बल्कि बाकी चीजें भी रात में ज्यादा कुशलता से कर पाती हूं मैं रात से बहुत पूर्ति महसूस करती हूं उसकी वजह क्या है धन्यवाद शायद


हर चीज अलग अलग करके दिखाती है देखी अभी क्योंकि हर रोशनी है मैं इस इंसान को इंसान को इंसान को इंसान को देख सकता हूं मान लीजिए लाइट चली गई और अंधेरा हो गया मैं बस लोगों के झुंड को देख पाऊंगा मैं इस इंसान को इंसान को इंसान को नहीं देख पाऊंगा तो रात में कुछ ऐसा है कि रात में सीमाएं थोड़ी धुंधली हो जाती हैं तो योग के लिए सुख शांति के लिए दोस्ती के लिए नज़दीकियां पढ़ाई फोकस इन सभी चीजों के लिए रात ज्यादा सहायक लगती है क्योंकि रात में आपके और दूसरे के बीच का अंतर कम हो जाता है सिर्फ इसलिए क्योंकि हमारी आंखें इस तरह से काम करती हैं जहां रोशनी ना हो वहां हमारे अनुभव में हर चीज मिलकर एक हो जाते हैं तो एक योगी एक भोगी और एक रोगी यह तीनों रात का इस्तेमाल करते हैं

हर चीज अलग अलग करके दिखाती है देखी अभी क्योंकि हर रोशनी है मैं इस इंसान को इंसान को इंसान को इंसान को देख सकता हूं मान लीजिए लाइट चली गई और अंधेरा हो गया मैं बस लोगों के झुंड को देख पाऊंगा मैं इस इंसान को इंसान को इंसान को नहीं देख पाऊंगा तो रात में कुछ ऐसा है कि रात में सीमाएं थोड़ी धुंधली हो जाती हैं तो योग के लिए सुख शांति के लिए दोस्ती के लिए नज़दीकियां पढ़ाई फोकस इन सभी चीजों के लिए रात ज्यादा सहायक लगती है क्योंकि रात में आपके और दूसरे के बीच का अंतर कम हो जाता है सिर्फ इसलिए क्योंकि हमारी आंखें इस तरह से काम करती हैं जहां रोशनी ना हो वहां हमारे अनुभव में हर चीज मिलकर एक हो जाते हैं तो एक योगी एक भोगी और एक रोगी यह तीनों रात का इस्तेमाल करते हैं

आप  इसका इस्तेमाल कर सकते हैं इसमें कोई समस्या नहीं है जब तक कि आप क्लास में सोती ना हो अगर आप क्लास में नहीं सोती तो यह चलेगा इसमें कुछ गलत नहीं है लेकिन आप इसे आजमा कर देखें क्या मैं कुछ अच्छा कर सकता हूं मैं कुछ ऐसा था जब मैं सोता था मेरा स्कूल आमतौर पर सुबह 8:30 का होता था 6 : 45 से मेरी मां और मेरी बहने मुझे जगाना शुरू कर देती थी बहुत सी चीजें करनी पड़ती थी

वह  मुझे बिस्तर पर उठा कर बैठा देती थी वह आकर मेरी वह  मरोड़ दी थी यह करती थी वह करती थी मेरी मां ने नरमी से करती थी मेरी बहन ने सख्ती से करती थी फिर वह मुझे खींची थी और मेरी मां टूथब्रश लाके कर मुझे दे देती थी मैं उसे मुंह में लगा कर सो जाता था मेरे कपड़े लाकर देती थी और कहती थी नहाने जाओ टाइम हो गया है मैं बाथरूम के अंदर जाता और सो जाता अगर कोई मुझे उठाएं तो मैं दिन में 1-2 बजे तक एक पत्थर की तरह से होता था याद कर कर बैठे नहीं बदलता था बस मुर्दे की तरह लेकिन मैंने 12 साल की उम्र में योग करना शुरू किया
शायद 8 या 9 महीनों के बाद उसके बाद चाहे जिस भी जगह पर होने पर चाहे कहीं भी होने पर चाहे जो टाइम जोन हो रोज में अलग टाइम जोन में होता हूं लेकिन मैं सुबह 3-4 जाग  जाता हूं क्योंकि उस वक्त प्रकृति ने कुछ बदलाव होते हैं मेरा शरीर बस जाग जाता है अगर मैं चाहूं मैं उठकर जो करना चाहे कर सकता हूं अगर मैं ना चाहूं तो मैं थोड़ा और सो सकता हूं लेकिन शरीर हमेशा जाग जाता है तो आपको सिस्टम में थोड़ी संवेदनशीलता लानी होती है कि आप इस धरती के अंस है हां या ना ? हम सब इस धरती से पोप अप हुए हैं

पोप अप से  आप सब चले जाएंगे आप गायब हो जाएंगे आपको विश्वास नहीं होता कि आप चले जाएंगे मैं मैं चला जाऊंगा हां वह सारे चतुर लोग अनगिनत लोग जो इस धरती पर आपसे और मुझसे पहले घूमते थे वह कहां है आपको लग सकता है कि आपका जीवन शानदार है वगैरा-वगैरा जहां तक धरती का सवाल है वह बस अपनी मिट्टी को रीसायकल कर रही है आपको उछाल दी है और फिर वापस खींच लेती है वह चलती है और फिर खींच लेती है तो इस जहां से पॉपअप में अहम चीज और सबसे अहम चीज यह है कि आप अपने भीतर संवेदनशीलता में ऐसी संवेदनशीलता की जीवन का हर आयाम आपके अनुभव में आ जाए इससे पहले कि आप मर जाएं क्या यह महत्वपूर्ण है कि आप जीवन को हरसंभव स्तर पर अनुभव करें अनुभव का मतलब है अनुभव का मतलब है लोग सोचते हैं हमें हर दिन पार्टी करना है एक ही चीज आप कितनी बार करेंगे इंसान के जीवन में खोजने के लिए बहुत कुछ है आपको संवेदनशील होना होगा संवेदनशील से मेरा मतलब है क्योंकि इस शब्द का एक गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाता है इस मायने  में जब लोग कहते हैं संवेदनशील है तो मतलब होता है जरा सी बात का बुरा मान जाएगी

जीवन का संवेदनशील होना और आपका संवेदनशील होना दो अलग चीजें जीवन के संवेदनशील होने का मतलब है कि अगर आप इस हॉल में आते हैं तो आप यहां मौजूद हर चीज का अनुभव करते आपसे कुछ नहीं छुपता अगर अब बाहर जाते हैं तो आप किसी चीज से नहीं चूकते जीवन के हर आयाम को आपके अनुभव में आना चाहिए एक बार एक  आदमी ने काम करवाने के लिए गधा खरीदा जिस आदमी ने गधा बेचा  उसने कहा देखो यह बहुत संवेदनशील है नहीं सकते आप बुरे शब्द नहीं बोल सकते आप गधे को गाली नहीं दे सकते आदमी ने  लेने का है यह तो बहुत अच्छी बात है गधों को पीटते पीटते और गालियां देते देते थक गया हूं इन कदमों से काम कराने के लिए मुझे हर रोज घटिया शब्द बोलने पड़ते मुझे संवेदनशील का अच्छा लगा और उसने गधे की संवेदनशीलता के लिए थोड़े ज्यादा पैसे भी चुकाया  है और उसे घर ले आए उसने गधे को बारे में रखा कल सुबह से घर पर जाना था वहां गया और गधे से बोला चली हमें चलना चाहिए कोई असर नहीं उसने फिर कहा कृपया चलिए कुछ नहीं हुआ उसमें घुटनों के बल बैठकर प्रार्थना की कुछ नहीं हुआ आपको उसे गाली नहीं देनी है आपको उसे पिटना नहीं उसे कुछ समझ में नहीं आया तो वह आदमी के पास वापस गया जिसने गधा बेचा था देखो मैंने गधे से विनती की गिराया प्रार्थना की उस पर कोई असर नहीं हो रहा है मुझे क्या करना चाहिए उस आदमी ने कहा चलो मैं देखता हूं

और वो आया उसने एक ऐसा मोटा डंडा उठाया सिर पर जोर से मारा फिर उसने डंडा फेंक दिया और कहा चलो गधा पीछे चल दिया वह आदमी वह आदमी आग बबूला हो गया और एक बेवकूफ तुमने कहा कि यह संवेदनशील घटाएं और जैसे तुमने जानवर को मारा है मैंने अपने पूरे जीवन में किसी जानवर को नहीं मारा वह बोला नहीं नहीं नहीं यह बहुत संवेदनशील है लेकिन पहले तुम्हें उसका ध्यान खींचना होगा तो संवेदनशीलता विकसित करने का मतलब है कि अगर आप अपनी आंखें बंद करें तो आप जान जाएगी चांद अभी किस अवस्था में क्योंकि यह सब आपके शरीर में हो रहा है हर दिन आपके सिस्टम में जाहिर हो रहा है

अगर पूर्णिमा अमावस्या हो तो पूरा समुद्र चलता है ज्वार भाटा आता है आपका भी समुद्र तट पर गए या नहीं जाते जाते हैं लेने हैं पूरा समुद्र ऊपर उठने की कोशिश कर रहा है आपके शरीर का 72 फ़ीसदी पानी है आपको लगता है कि कुछ नहीं होता सूरज और चंद्रमा की स्थिति और कई चीजें जो धरती के साथ हो रही हैं वह आपके साथ भी हो रही है आपके जीवन को संवेदनशील बनना चाहिए तभी आप जानेंगे कि आपके जीवन के हर पहलू को कैसे संभाले

अपने सामाजिक पहलू को संवेदनशील मत बनाइए अगर आपके भीतर का जीवन संवेदनशील बन जाए और जीवन के साथ जो हो रहा है अगर वह एक चीज आप जानते हैं तो आप देखेंगे कि आपका जीपीएस ऑन हो गया है तब कोई समस्या नहीं होगी आप कभी खाएंगे नहीं इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन क्या कहता है आपके ऐसे हालात में पहुंच गए हैं आप कभी भट्ट करेंगे नहीं क्योंकि आपका जीवन संवेदनशील है इस जीवन की बस यही जरूरत है कि से एक जीवन के रूप में संवेदनशील बनना है अभी हमने एक ऐसा मनोवैज्ञानिक ढांचा विकसित कर लिया है जिसका जीवन से कोई लेना देना नहीं है इसका थोड़ा जीवन  से कोई लेना देना नहीं है

क्या अतीत या भविष्य में जाकर वापस आ सकते हैं? is it possible to go back in time ?

क्या अतीत या भविष्य में जाकर वापस आ सकते हैं?is it possible to go back in time ?

क्या अतीत या भविष्य में जाकर वापस आ सकते हैं?
Src:- Sadhguru

सवाल  :-

प्राचीन काल के योगियों से लेकर इंटरस्टेलर जैसी लोकप्रिय फिल्मों तक समय की यात्रा की कहानियां और शायद कुछ असली घटनाएं रही हैं क्या समय की यात्रा वाकई संभव है अगर हां तो मैं समय की यात्रा करना कैसे सीख सकता हूं

सद्गुरु  :-

देखिए इन चीजों को काफी गलत समझा गया है .क्योंकि दुर्भाग्य से विज्ञान और गुप्त योगिक ज्ञान हॉलीवुड फिल्मों से आपके पास आ रहे हैं इस संस्कृति में ऐसे लोग रहे हैं जिन्हें त्रिकाल ज्ञानी कहा जाता है आपके जीवन में अनुभव के 3 आयाम होते हैं अतीत नाम की एक चीज होती है जो आपके भीतर यादों का भंडार है वर्तमान नाम की चीज होती है जो अभी का जीवंत अनुभव है भविष्य नाम की चीज होती है जो हमारी कल्पना की शक्ति है तो आपके जीवन का अनुभव यादाश्त वर्तमान अनुभव और कल्पना के बीच होता है ज्यादातर लोगों के साथ समस्या यह है कि वह इन तीनों चीजों में साफ़ अंतर नहीं कर पाते, ज्यादातर इंसान. इसी कारण जो चीज 10 साल पहले हुई थी उसका दुख आपको आज भी होता है ना जो चीज शायद परसों हो अभी से आपको उसका दुख है 10 साल पहले या 10 दिन पहले जो चीज हुई थी क्या अभी उसका अस्तित्व है क्या अभी उसका अस्तित्व है जो चीज शायद परसों हो क्या अभी उसका स्थिति में नहीं तो अगर आप किसी ऐसी चीज से दुखी हैं जिसका अस्तित्व ही नहीं है तो हम आप को समझदार कहे क्या पागल ? अगर आप किसी ऐसी चीज का दुख भोग रहे हैं जिसका अस्तित्व ही नहीं है तो यह समझदारी है या पागलपन ? आप कितने लोगों को जानते हैं आप के सहित जो इस तरह पागल है वह ऐसी चीजों से दुखी हैं जिनका अस्तित्व नहीं है लगभग 99.99% हर समय हो रहा है तो इसी तरह के मूर्ख समय की यात्रा कर रहे हैं समय योग एक विज्ञान में आधुनिक भौतिक विज्ञान हमेशा इन दो आयामों को लेकर उलझन में रहता है समय और स्थान या स्थान और समय वे आमतौर पर यही कहते हैं योग में हम इसे काम कहते हैं काल शब्द का अर्थ तमिल में भी समय होता है मगर काल का अर्थ खालीपन भी होता है काल  काला का मतलब है अंधेरा, अंधेरा यानी कि वहां कुछ नहीं है न रोशनी और कुछ वह खाली स्थान है काल का अर्थ है समय तो हम एक ही शब्द इस्तेमाल कर रहे हैं इस समय और स्थान दोनों के लिए हमारे पास बस एक फर्क है काल और महाकाल एक तरह का समय है जो जीवन के भौतिक आयामों के चक्रों से पैदा होता है भौतिक आयामों के चक्रों से मेरा मतलब है कि हर भौतिक वस्तु की गति चक्रधार होती है चाहे वह एक परमाणु हो या पूरा ब्रह्मांड हो हर चीज की गति चक्रधार है सभी ग्रह ब्रह्मांड हर चीज हर भौतिक चीज मूल रूप से चक्रधार गति में है तो यह काल है

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तो यह काल है वह समय जिसे आप जानते हैं भौतिक वस्तुओं के गोल घूमने के कारण है धरती एक बार घूमती है हम उसे दिन कहते हैं चंद्रमा एक चक्कर लगाता है हम इसे 1 महीना कहते हैं धरती सूरज का चक्कर लगाती है हम इसे 1 साल कहते हैं आप समय को केवल इसी तरह जानते हैं तो आप जिस समय को जानते हैं वह सिर्फ चक्रों के कारण है एक ऐसा भी समय है जो भौतिक प्रकृति से परे है जो भौतिक वस्तुओं के चक्कर लगाने के कारण नहीं है इसे हम महाकाल कहते हैं महाकाल महाकाल में स्थान भी शामिल है आम तौर पर आधुनिक भौतिक विज्ञान में यह स्थान के कारण ही दूरी के कारण ही समय होता है अगर आप पॉइंट पॉइंट जाना चाहते हैं तो आपको समय चाहिए मगर योग एक विज्ञान में अपने अनुभव से हम इसे इस तरह देखते हैं कि समय है इसलिए स्थान की संभावना है आज बहुत सुंदर तरीके से लगभग 15 साल पहले जब उनके पहले से छात्रों ने उनसे पूछा कि इस ब्रह्मांड की प्रकृति क्या है यह कहां से शुरू होता है कहां खत्म होता है कितना बड़ा है वह हंसकर बोले तुम्हारा ब्रह्मांड में उसे एक सरसों के दाने में भर सकता हूं बहुत बढ़िया पैकिंग है उन्होंने कहा इस पूरे ब्रह्मांड को मैं एक सरसों के दाने में भर सकता हूं क्योंकि वह सिर्फ समय का परिणाम है और दूरी सिर्फ समय का नतीजा है तो हम लोगों को त्रिकाल ज्ञानी कहते हैं और हम लोगों को अकाल ज्ञानी भी कहते हैं जिसका अर्थ है समय रहित लोग जो लोग समय से परे होते हैं समय से परे होने का मतलब है आप अभी यहां बैठे हैं अगर मैं आपको और 6 घंटे यहां बैठा लो नहीं आपको इतना समय नहीं लगेगा अगर मैं आपको सिर्फ 2 घंटे और यहां बैठा लो सद्गुरु कम से कम पानी ? ठीक है पानी पी लो पानी मतलब सद्गुरु ठीक है जा कर आओ और 2 घंटे सद्गुरु ठीक है हम आपको वह भी देते हैं उसके बाद आप परमिशन नहीं मांगेंगे आपका शरीर समय का चक्र है ना घड़ी देखने की जरूरत नहीं है अगर आप अपने ब्लैडर पर ध्यान दें आपको समय पता चल जाएगा हां या ना वह समय का ध्यान रख रहा है तो अभी समय कि आप की समझ सिर्फ आप की भौतिक पहचान के कारण है अगर आप शरीर को महसूस किए बिना यहां बैठ सके तो आपको समय का पता नहीं चलेगा आपने उन लोगों के बारे में सुना होगा जो कई घंटे कई दिनों तक बैठे रहे.

मेरे साथ ऐसा हुआ एक बार जब मैं आपसे थोड़ा सा बड़ा था मैं 25 साल का था मैं एक जगह बैठा और अचानक मुझे समय का एहसास नहीं हुआ मुझे लगा कि 10-20 मिनट हुए हैं लेकिन 4:30 घंटे बीत गए थे और मैं परमानंद से फूट रहा था एक जगह बैठ जा और मुझे लगता कि 2 मिनट हुए हैं जबकि कई घंटे 7 घंटे निकल जाते 1 दिन में बैठा और मुझे लगा कि 25 मिनट हुए होंगे मैं मैसूर के पास एक ग्रामीण इलाके में बैठा हुआ था और मैंने आंखें खुली तो भारी भीड़ जमा थी मेरे गले पर फूल मालाएं लटकी हुई थी लोग मेरे पैर खींचने की कोशिश कर रहे थे मैंने पूछा तुम लोग कहां से आ गए फिर उन्होंने कहा आप 13 दिन से यहां बैठे हैं मुझे लगा कि सिर्फ 25 मिनट हुए हैं जब मैंने पैक खोलने की कोशिश की तो पाया कि मेरे घुटने जल गए थे उन्हें सीधा में बहुत दिक्कत हुई मगर मेरे अनुभव में मुझे लगा कि सिर्फ 25 30 मिनट हुए हैं यह बातें शायद आपके लिए समझने में थोड़ी मुश्किल हो मगर क्या आपने ध्यान दिया है कि किसी दिन जब आप बहुत खुश हैं तो 24 घंटे  10 मिनट की तरह निकल गए और दिन आप थोड़े उदास थे 24 घंटे पूरी जिंदगी जितने लंबे लगे समय बहुत सापेक्ष अनुभव है लोग कहते हैं 1 मिनट कितना लंबा है यह इस पर निर्भर करता है कि आप बाथरूम के दरवाजे के किस तरह से दरवाजा खटखटा तो वह कहता है बस 1 मिनट रुको ,

एक मिनट  ???

भटकने से बचने का तरीका ! How to avoid distractions.

भटकने से बचने का तरीका ! 

How to avoid distractions !

How to avoid distraction

Src:- Sadhguru

    मन का भटकाव से पश्चिम में नहीं करताजो अपना ध्यान भटका ना चाहते हैं, उनके लिए भटकने के लिए हर जगह सिर्फ पश्चिम में ही नहींऔर बस आज ही नहीं हजार साल पहले भी लोग भटक जाते थे मेरा यकीन कीजिएयह मत सोचें कि हजार साल पहले हर कोई एकाग्र और शानदार थानहीं वह उतना ही अच्छे या उतने ही बुरे थे जितने कि आप हैंवह भी छोटे ग्रुप में गपशप करते थेअब हम दुनिया भर में गजब कर रहे हैंतो ऐसी क्या चीज है जो मुझे करनी चाहिए ?

       एकाग्र होने के लिए या जो मिल रहा है उसे ग्रहण करने के लिए बहुत आसान हैखुद को याद दिलाई है कल सुबह जब आप जानते हैं तो चेक कीजिए अभी तक मैं जिंदा हूं ? क्योंकि हर दिन इस धरती पर 10 लाख से भी ज्यादा लोग मर जाते हैंआप कल सुबह जाग गए लाखों लोग कल सुबह नहीं जागे कल सुबह नहीं जागेंगे यकीन मानिएआप जाग गए ? बस करें आप अभी भी जिंदा है बहुत बढ़िया है आप अभी जीवित हैं कम से कम आप मुस्कुरा सकते हो मैं अभी जिंदा हूं.

    बस उन तीन चार पांच लोगों को भी चेक करें जो आपके जीवन में वाकई मायने रखते हैं चेक करें अब जीवित हैं क्योंकि अगर 10 लाख  लोग मर गए तो कम से कम एक करोड़ लोगों ने अपने किसी प्रिय जन को खो दिया हैतो वह सभी जो जो आपके लिए वाकई मायने रखते हैंआप जीवित हैं वह जीवित है बहुत बढ़िया आज बहुत जबरदस्त दिन हैइसे हल्के में मत लीजिए कोई मजाक नहीं है क्योंकि मैं आपको यह इसलिए याद दिला रहा हूंक्योंकि ज्यादातर लोग सोचते हैं

  दूसरे लोग मरते हैंमैं नहीं सिर्फ दूसरे लोग मरते हैं नहीं नहीं आप और मैं भी मरेंगेसद्गुरु में एक आध्यात्मिक सवाल पूछ रहा हूं और आप मुझे डरावनी चीजें याद दिला रहे हैंइसमें डरने को कुछ नहीं हैमौत एक ऐसी चीज हैजो हम सब के लिए है हमारे बारे में जो चीज ऐसी हैचाहे काले सफेद नीले पीले हो आप जिस तरह भी हो आदमी औरत या दूसरे से लिंक आप  चाहे जो कुछ हम सब के बीच जो एक चीज समान हैवह है

  हम 1 दिन मर जाएंगे मृत्यु की सार्वभौमिकता को देखेंजब आप खुद को याद दिलाते हैंकि आप नश्वर हैं सिर्फ तभी अपने अस्तित्व की भौतिकता से परे कुछ और जाने की चाहत एक सक्रिय प्रक्रिया बनती हैआप ग्रहण शील सिर्फ तभी बनेंगे जब आप जान जाते हैं कि यह शरीर जो आप धो रहे हैंयह मनोवैज्ञानिक नाटक जिससे आप गुजर रहे हैंअभी यह सब चल रहा हैलेकिन एक दिन यह खत्म हो जाए बहुत आसानी से खत्म हो जाएगाआपको इंतजार करना है देखिए मृत्यु को हासिल करने के लिए आपको कुछ नहीं करना है.

   बस इंतजार करना है अपने और दूसरों के लिए भी लोग कहते हैंसद्गुरु ये आदमी मेरा दुश्मन है और इसे में सहन नहीं कर सकतामें कहता हूं बस इंतजार कीजिएआपको कुछ नहीं करना है बस इंतजार कीजिए एक न एक दिन आपको छुटकारा मिल जाएगा या तो वह मरेगा या तो आपतो ऐसा करेंहर घंटे अभी 7:30 बजे हैं मैं अभी जिंदा हूंआज 6:30 से 7:30 बजे तक आप जानते हैं कितने लोग मर गए ? लेकिन अभी मैं उनमें से नहीं हूं

  तो अगर आप अपने नश्वर प्रकृति के प्रति लगातार सचेतन है तो आप अपने अस्तित्व के आध्यात्मिक आयाम के प्रति 100 फ़ीसदी जीवंत हो जाएंगेक्योंकि कहीं ना कहीं ऐसा नहीं कि बौद्धिक रूप से आप नहीं जानते लेकिन अपने अनुभव में आप अमर हैंक्योंकि जब मैं आपके खरीदे हुए जूतों की संख्या देखता हूंतो ऐसा लगता है कि आप 10000 साल तक जीने वाले हैं कपड़ों और जूतों की संख्या जब मैं उन्हें देखता हूं ऐसा लगता है

 कि तमाम लोग हजार या 10000 साल जीने का सोच रहे हैं नहीं नहीं नहीं यह जीवन बहुत छोटा हैअगर आप जानते हैं कि यह जीवन छोटा है और आप निश्चय ही नश्वर हैतो हम इसे योग से लंबा करने की कोशिश करेंगे हम इसे खींचने की और इसे थोड़ा और लंबा करने की कोशिश करेंगे लेकिन आप फिर भी मरेंगे अगर आप अपने जीवन के हर पल में इस बात के प्रति जागरूक हैशुरुआत में थोड़ा संघर्ष हो सकता है लेकिन फिर भी खुद को हर मिनट याद दिलाएकि मैं नशवर हूंकिसी दिन मैं मर जाऊंगा और यह आज भी हो सकता हैमृत्यु को लेकर सहज रही हैतब इस भौतिक प्रकृति से परे जो है उसे जानने के लालषा के अंदर फुट पड़ेगीएक बार  लालषा आ गई तो आप 100 फ़ीसदी ग्रहण सील हो जाएंगेहर उस चीज के प्रति जिसका मैं ठीक हूं - Sadhguru